⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer): यह माँ तरकुलहा देवी धाम की आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। यह वेबसाइट केवल श्रद्धालुओं की जानकारी हेतु एक स्वतंत्र प्रयास है।

जय माता दी

🔇
🙏 जय माता दी! चैत्र रामनवमी मेले के लिए प्रसाद और झोपड़ी की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है। मुंडन, जनेऊ और मन्नत पूरी होने पर बलि अनुष्ठान हेतु विशेष व्यवस्था। ☎ संपर्क: +91 8299363778 🙏
🔔 विशेष सूचना: मंदिर परिसर में पशु बलि (बकरे की बलि), मटन प्रसाद, मुंडन और जनेऊ संस्कार की उत्तम व्यवस्था उपलब्ध है। कृपया अपनी बुकिंग समय से सुनिश्चित करें। 🔔

माँ तरकुलहा देवी महातीर्थ

आस्था, शक्ति और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदान का पावन स्थल।

☎ 8299363778
0 वर्ष पुराना इतिहास
0 दैनिक श्रद्धालु
0 उपलब्ध झोपड़ियां
0 % आत्मिक शांति
लाइव: सामान्य भीड़ (दर्शन में ~20 मिनट)
☀️ मौसम: 28°C साफ़ (प्रसाद पकाने हेतु उत्तम)
🌐 भाषा: हिंदी ▼

आज का पंचांग व आगामी तिथियां

धर्म-कर्म, पूजा और मुंडन के लिए शुभ मुहूर्त की जानकारी

📅 आज का पंचांग ()

  • दिन: लोड हो रहा है...
  • तिथि (अनुमानित): लोड हो रहा है...
  • राहुकाल: लोड हो रहा है...
    (इस समय में मुंडन/बलिदान शुरू करने से बचें)
  • शुभ मुहूर्त (अभिजीत): दोपहर 11:45 से 12:30 बजे तक

🔔 आगामी प्रमुख व्रत व मेले

  • तिथियां लोड हो रही हैं...

धाम के प्रमुख अनुष्ठान एवं मान्यताएं

गोरखपुर का ऐतिहासिक तरकुलहा देवी मंदिर अपनी विशेष मान्यताओं और प्रसाद के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

🐐 पशु बलि (बकरे की बलि)

यहाँ भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर देवी माँ को बकरे की बलि अर्पित करते हैं। यह इस सिद्ध पीठ की सबसे प्राचीन और प्रमुख परंपरा है जो बाबू बंधू सिंह के समय से चली आ रही है।

🍲 मटन प्रसाद वितरण

बलि के पश्चात्, बकरे के मांस को परिसर में ही मिट्टी के बर्तनों (हांडी) में पकाया जाता है और इसे पवित्र प्रसाद के रूप में भक्तों व परिवारों के बीच वितरित किया जाता है।

🥥 नारियल व चुनरी अर्पण

जो श्रद्धालु पशु बलि नहीं देते, वे माता को चुनरी, सिंदूर और नारियल अर्पित कर अपना आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। माता सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

👶 मुंडन और जनेऊ संस्कार

मंदिर परिसर में बच्चों के मुंडन (सिर मुंडवाना) और जनेऊ (पवित्र धागा) जैसे मांगलिक अनुष्ठान भी पूरे विधि-विधान से पंडितों द्वारा संपन्न कराए जाते हैं।

🔔 मन्नत के घंटे

परिसर में मौजूद प्राचीन तरकुल के वृक्षों पर मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु घंटी (Bells) और लाल चुनरी बांधते हैं।

🎪 1 महीने का रामनवमी मेला

चैत्र रामनवमी से यहाँ एक महीने तक भारी मेला लगता है, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल से लाखों भक्त माता के दर्शन और अनुष्ठान के लिए आते हैं।

दैनिक आरती व दर्शन समय

🌅 प्रातः काल दर्शन

मंगला आरती: सुबह 5:00 बजे

आम दर्शन: सुबह 5:30 से दोपहर 12:00 बजे तक

दोपहर भोग / विश्राम: 12:00 से 1:00 बजे तक

🌇 संध्या काल दर्शन

पट खुलने का समय: दोपहर 1:00 बजे

संध्या महाआरती: शाम 7:00 बजे

शयन आरती: रात्रि 9:00 बजे

|| श्री दुर्गा चालीसा व प्रमुख मंत्र ||

"सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥"

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुम को निश-दिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

शहीद बाबू बंधू सिंह और धाम का इतिहास

स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदान और माता के चमत्कार की कहानी

गोरखपुर से मात्र 24 किलोमीटर (चौरी-चौरा के पास) स्थित यह मंदिर आस्था के साथ-साथ देशभक्ति का महान प्रतीक है। यहाँ माता की पूजा स्वतंत्रता सेनानी बाबू बंधू सिंह जी द्वारा की जाती थी।

1857 की क्रांति के दौरान, बाबू बंधू सिंह गुरिल्ला युद्ध प्रणाली का इस्तेमाल कर अंग्रेजों से लड़ते थे और इसी तरकुल (ताड़) के पेड़ के नीचे माता को शत्रुओं के सिर की बलि चढ़ाते थे। जब उन्हें गिरफ्तार किया गया और 12 अगस्त 1857 को फांसी दी जाने लगी, तो माता के चमत्कार से 7 बार फांसी का फंदा टूट गया

8वीं बार जब बंधू सिंह जी ने स्वयं माता से प्रार्थना कर अपना बलिदान स्वीकार करने की विनती की, तभी अंग्रेज उन्हें फांसी दे पाए। तभी से यहाँ पशु बलि की प्रथा शुरू हुई और आज भी यहाँ माता को बकरे की बलि चढ़ाई जाती है।

Temple Bells Ancient

धाम के प्रमुख अनुष्ठान एवं मान्यताएं

गोरखपुर का ऐतिहासिक तरकुलहा देवी मंदिर पशु बलि, विशेषकर बकरियों की बलि के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ मन्नतें पूरी होने पर भक्त माता को बलि चढ़ाते हैं।

🐐 पशु बलि (बकरे की बलि)

यहाँ भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर देवी माँ को बकरे की बलि अर्पित करते हैं, जो यहाँ की सबसे प्रमुख और प्राचीन परंपरा है।

🍲 मटन प्रसाद वितरण

बलि के बाद, बकरे के मांस को मिट्टी के बर्तनों (हांडी) में पकाया जाता है और इसे पवित्र प्रसाद के रूप में भक्तों के बीच वितरित किया जाता है।

🥥 नारियल व चुनरी अर्पण

जो श्रद्धालु पशु बलि नहीं देते, वे देवी माँ को नारियल, चुनरी और सिंदूर अर्पित कर अपना आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

👶 मुंडन और जनेऊ

मंदिर परिसर में बच्चों के मुंडन (सिर मुंडवाना) और जनेऊ (पवित्र धागा) जैसे मांगलिक व धार्मिक अनुष्ठान भी पूरे विधि-विधान से संपन्न कराए जाते हैं।

🔔 मन्नत के घंटे

मान्यता है कि माता के दरबार में मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। मन्नत पूरी होने पर भक्त यहाँ आकर घंटी (Bell) भी बांधते हैं।

🎪 रामनवमी मेला व नवरात्रि

शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं। चैत्र रामनवमी से यहाँ एक माह तक भारी मेला लगता है।

⚔️ यह मंदिर अमर शहीद बाबू बंधू सिंह जी से भी जुड़ा है, जो यहाँ माँ की पूजा करते थे और इसी स्थान पर अंग्रेजों के सिर की बलि चढ़ाते थे।

प्रमुख त्यौहार एवं मेले

माता के दरबार में लगने वाले विशाल मेलों की जानकारी

🌺 चैत्र रामनवमी मेला

चैत्र रामनवमी के अवसर पर यहाँ एक महीने तक चलने वाला विशाल मेला लगता है। इसमें बिहार, नेपाल और पूरे उत्तर प्रदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं।

🌺 शारदीय नवरात्रि

अश्विन मास की नवरात्रि में 9 दिनों तक माता का विशेष श्रृंगार और भव्य आरती होती है। अष्टमी और नवमी के दिन विशेष बलि और अनुष्ठान होते हैं।

प्रसाद व अनुष्ठान हेतु स्थान (झोपड़ी)

बलि के उपरांत मटन प्रसाद पकाने एवं मुंडन/जनेऊ के लिए अपनी जगह सुरक्षित करें।

Small Jhopri

पारिवारिक झोपड़ी (छोटी)

5 लोगों तक के परिवार के लिए शांति से प्रसाद पकाने की उत्तम व्यवस्था।

Large Jhopri

सामूहिक झोपड़ी (बड़ी)

6 से 15 श्रद्धालुओं के लिए अतिरिक्त स्थान और चूल्हे।

Open Space Nature

मुंडन / प्राकृतिक स्थान

वृक्षों की छांव में अनुष्ठान और प्रसाद बनाने का खुला स्थान।

पूजन सामग्री व प्रसाद की दरें

पारदर्शिता हेतु मंदिर समिति द्वारा निर्धारित उचित मूल्य सूची (अनुमानित)

सामग्री / सेवा का नाम विवरण (Details) निर्धारित मूल्य (Rates)
सूखी लकड़ी (Wood)चूल्हे में प्रसाद पकाने हेतु 1 गट्ठर₹ 50 - ₹ 80
मिट्टी की हांडी (Mud Pot)शुद्ध पारंपरिक मिट्टी का बर्तन₹ 40 - ₹ 150
बलिदान / मुंडन रसीदमंदिर कार्यालय द्वारा अनिवार्य रसीद₹ 11 - ₹ 51
नारियल व चुनरी प्रसादमाता को चढ़ाने हेतु पूजा की थाली₹ 50 - ₹ 200
झोपड़ी सहयोगप्रसाद बनाने के स्थान का सफाई शुल्कश्रद्धानुसार

यात्री निवास एवं धर्मशाला

Dharamshala

माँ भगवती यात्री निवास

जो श्रद्धालु रात में रुकना चाहते हैं, उनके लिए मंदिर परिसर के समीप ही धर्मशाला की व्यवस्था है।

  • ✓ स्वच्छ एवं हवादार कमरे
  • ✓ 24 घंटे बिजली और पानी की सुविधा

ई-पूजा एवं ऑनलाइन संकल्प

देश-विदेश में बैठे श्रद्धालुओं के लिए विशेष पूजा व्यवस्था

पूरी प्रक्रिया (How it works)

  • 1
    आप ऑनलाइन फॉर्म में अपना नाम और गोत्र भरेंगे।
  • 2
    मंदिर के पुजारी आपके नाम से संकल्प लेकर पूजा करेंगे।
  • 3
    आपको पूजा का वीडियो WhatsApp पर भेजा जाएगा।
  • 4
    माता का भभूत और सूखा प्रसाद डाक से भेजा जाएगा।
Puja Thali
▶ माता का पचरा (भजन) तरकुलहा देवी स्पेशल

घर बैठे माता का भभूत व प्रसाद मंगाएं

जो श्रद्धालु मंदिर नहीं आ सकते, वे डाक (Post) द्वारा माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

* प्रसाद भारतीय डाक (Speed Post) द्वारा 5-7 कार्य दिवसों में पहुंचाया जाएगा। (नोट: ऑनलाइन ऑर्डर में मटन प्रसाद नहीं भेजा जाता)।

🪔 डिजिटल दीया प्रज्वलित करें

माता के समक्ष अपनी मनोकामना लिखें और डिजिटल दीया जलाएं।

🪔

प्रमाणित दुकानदार व सेवादार सूची

दुकान / सेवादार का नामदुकान नंबरउपलब्ध सामग्रीसत्यापन
रामू प्रसाद भंडारदुकान सं. 04चुनरी, प्रसाद, नारियल✓ Verified
शंकर लकड़ी वालेझोपड़ी क्षेत्रसूखी लकड़ी✓ Verified
तरकुलहा कुम्हार स्टोरदुकान सं. 12मिट्टी की हांडी✓ Verified

परिसर की सुविधाएं

🪵

सूखी लकड़ी

प्रसाद बनाने हेतु चूल्हे के लिए अच्छी और सूखी लकड़ी उपलब्ध है।

🏺

मिट्टी के बर्तन

परंपरानुसार प्रसाद पकाने के लिए शुद्ध मिट्टी की हांडी मिल जाती है।

🚰

स्वच्छ जल

पीने के लिए और बर्तन धोने के लिए साफ़ पानी की व्यवस्था है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या हम अपना खुद का चूल्हा और बर्तन ला सकते हैं?

हाँ, यदि आप "खुला स्थान" बुक करते हैं, तो आप अपना स्वयं का चूल्हा और बर्तन ला सकते हैं।
2. क्या ऑनलाइन बुकिंग के लिए कोई एडवांस पेमेंट देना है?

नहीं, अभी वेबसाइट से बुकिंग नि:शुल्क है। आप परिसर में आकर अपनी सुविधानुसार झोपड़ी का शुल्क जमा कर सकते हैं।
3. मेले के समय दर्शन और प्रसाद बनाने में कितना समय लगता है?

दर्शन में 1-2 घंटे और प्रसाद पकाने में 2-3 घंटे तक लग सकते हैं। समय से पहले झोपड़ी बुक कर लें।

श्रद्धालुओं के अनुभव

"बाबू बंधू सिंह जी के बलिदान की कहानी सुनकर यहाँ आने की इच्छा हुई। यहाँ की हांडी (मिट्टी के बर्तन) में बना प्रसाद दुनिया में सबसे स्वादिष्ट होता है।"

- अवनीश त्रिपाठी

"यहाँ की व्यवस्था बहुत अच्छी हो गई है। लकड़ी और पानी की कोई कमी नहीं रहती। सेवादार भी बहुत मददगार हैं।"

- सुनीता देवी

आस-पास के प्रमुख दर्शनीय स्थल

Chauri Chaura Memorial

चौरी-चौरा शहीद स्मारक

मंदिर से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर ऐतिहासिक चौरी-चौरा शहीद स्मारक स्थित है। यहाँ जाकर आप अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं।

Gorakhnath Temple

श्री गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर

यहाँ से लगभग 25 किमी दूर गोरखपुर शहर में प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर स्थित है। मकर संक्रांति पर यहाँ लगने वाला 'खिचड़ी मेला' विश्व प्रसिद्ध है.

🚨 सुरक्षा एवं आपातकालीन संपर्क

🚓 पुलिस: 112

🚑 एंबुलेंस: 108

☎ कार्यालय: 8299363778

मंदिर के नियम एवं दिशा-निर्देश

धाम तक कैसे पहुँचें?

Travel Guide Map
  • ✈️ हवाई मार्ग: निकटतम 'महायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट' (लगभग 28 किमी)।
  • 🚆 रेल मार्ग: नज़दीकी रेलवे स्टेशन 'चौरी-चौरा' (5 किमी)। प्रमुख स्टेशन 'गोरखपुर जंक्शन' (24 किमी)।
  • 🚌 सड़क मार्ग: यह धाम गोरखपुर-देवरिया नेशनल हाईवे (NH) पर स्थित है।

हमसे संपर्क करें

मुंडन, जनेऊ या मन्नत की बुकिंग संबंधी किसी भी सहायता के लिए संपर्क करें

कार्यालय संपर्क

📍
पता:
गोरखपुर-देवरिया नेशनल हाईवे-1,
चौरी-चौरा से 5 किमी दूर, उत्तर प्रदेश
📞
फ़ोन नंबर:
+91 8299363778

अपना संदेश भेजें

📞